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झूठे लोग अक्सर सच का भ्रम पैदा कर लोगों को गुमराह करते हैं | सामाजिक जागरूकता विचार | Kosare Maharaj

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 झूठे लोग सच का भ्रम कैसे पैदा करते हैं : Kosare Maharaj




                       किसी झूठ को इतनी बार कहो कि वो सच बन जाए और सब उस पर यक़ीन करने लगें आप ने भी अपने आस-पास ऐसे लोगों को देखा होगा, जो बहुत ही सफ़ाई से झूठ बोल लेते हैं. वे अपना झूठ इतने यक़ीन से पेश करते हैं कि वह सच लगने लगता है. हमें लगता है इंसान इतने भरोसे से कह रहा है, तो बात सच ही होगी हमारे इस ख़याल को मनोवैज्ञानिक सही नहीं मानते. वे इसे सच का भ्रम मानते हैं इस प्रयोग में जो लोग शामिल हुए उनमें से कुछ ने सच के समानांतर एक और बात को सही माना जो सच नहीं थी. यह कहा जाए कि बेर एक तरह के सूखे हुए आलू मनुका हैं. यह बात कई बार सच भी हो सकती है.


               लेकिन अगर यह कहा जाए कि एक खजूर सूखा हुआ आलू मनुका है तो यह सच नहीं हो सकता. क्योंकि खजूर कभी सूखा हुआ आलू मनुका हो ही नहीं सकता. लेकिन अगर इस बात को बार बार कहा जाए तो हो सकता है कि लोग इसे ही सच समझने लगें.


               जो लोग एस प्रयोग में शामिल हुए थे, उनके साथ यही बार बार में फिर से दोहराया गया. लेकिन इस बार उन्हें कुछ चीज़ें नई दिखाई गईं. कुछ चीज़ें वही थीं जो पहले भी दिखाई जा चुकी थी. दिलचस्प बात यह थी कि जो चीजें पहले दिखाई गई थी, उन्हीं को इन प्रतिभागियों ने सही माना, इस बात कि परवाह किए बिना कि वो सच हैं भी या नहीं. वे ऐसा शायद इसीलिए कर पाए क्योंकि वे उन चीज़ों को पहले भी देख चुके थे. इसलिए उन्हें लगा यही सच है. लिहाज़ा प्रयोगशाला में किए गए इस प्रयोग से यह बात तो साबित हो जाती है कि अगर झूठ को बार बार बोला जाए, वह सच बन जाता है अगर हम अपने आस-पास देखें तो विज्ञापन बनाने वालों से लेकर राजनेता तक सभी इंसान की इस कमज़ोरी का फ़ायदा उठाते हैं.   


              वे एक ही बात इतनी बार कहते हैं कि लोगों को वह सच लगने लगती है प्रयोगशाला में किए गए इस प्रयोग पर अगर भरोसा कर भी लिया जाए तो किसी शख़्स को अपनी बात मनवाने के लिए इतने जतन करने की ज़रूरत क्यों पड़ती है? क्यों अपनी बात मनवाने के लिए उसे तरह तरह के तरीक़े अपनाने पड़ते हैं?


             हमारे पूर्व ज्ञान के साथ हमारे सच का भ्रम कैसे काम करता है जैसे प्रशांत महासागर दुनिया का सबसे बड़ा महासागर है. यह एक ऐसी बात है जिसे हर कोई सच मानता है. यह बयान कि अटलांटिक महासागर दुनिया का सबसे बड़ा महासागर है, झूठा बयान है. लेकिन हो सकता है लोग इसे ही सच मान बैठें. इस टेस्ट के नतीजे बताते हैं कि झूठ के आगे हमारा पूर्व ज्ञान भी किसी काम नहीं आता. सच का भ्रम उस पर भी हावी हो जाता है 



            अगर इस बात को सच मान लिया जाए कि बार-बार झूठ बोलने से वह सच बन जाता है तो यह इंसान की तार्किक क्षमता पर सवालिया निशान लगाता है किसी बात का बार-बार दोहराया जाना सच पर हावी नहीं हो सकता. कुछ प्रयोगों में पाया गया है कि जो बात सच थी लोग उस पर क़ायम रहे. उनके सामने बहुत बार एक ही बात को दोहराया गया ज्ञान के आधार पर 'सच के भ्रम' का सामना किया जा सकता है हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं, 


         जहां सच सबसे ऊपर है और होना भी चाहिए. अगर सच और झूठ का फ़र्क़ किए बिना सिर्फ़ अपनी बात मनवाने के लिए कोई बात बार-बार दोहराई जाए तो यह इंसानियत के लिए सही नहीं है अगर आप ऐसा करते हैं तो आप एक ऐसी दुनिया बना रहे हैं जहां झूठ और सच का फ़र्क ही मिट जाएगा. लोग गुमराह होने लगेंगें. इसलिए ज़रूरी है कि किसी भी बात पर यक़ीन करने के बजाय उसे हर तरह से जांच-परख लें


भ्रम के हैं कई रूप :-



(१) नियंत्रण का भ्रमः इससे पीड़ित व्यक्ति में एक ऐसा गलत विश्वास या सोच बैठ जाता है कि उसका मन, उसके विचार, या बर्ताव पर किसी दूसरे इंसान का नियंत्रण होता है। (२) बेवफाई का भ्रमः इसमें लगता है कि पति या पत्नी का किसी और से अफेयर चल रहा है। अकसर इससे भ्रमित इंसान सुबूत जुटाने की कोशिश में लगता है, जो वास्तव में अफेयर है ही नहीं। (३) आरोपी मानने का भ्रमः ऐसे भ्रम में मरीज पश्चाताप या अपराधी होने की गलत भावना का शिकार होता है। (४) भव्य भ्रमः इसमें पीड़ित सोचता है कि उसमें कुछ विशेष शक्तियां, बहुत ताकत, जानकारी या क्षमताएं मौजूद है, जो किसी दूसरे में नहीं है। (५) संदर्भ का भ्रमः इसमें पीड़ित को लगता है कि उसके चारों तरफ होने वाली नकारात्मक घटनाएं उससे जुड़ी हुई हैं। (६) दैहिक भ्रमः इसमें इंसान को बिना किसी वजह लगता है कि वह बीमार है, जबकि वास्तव में वह बीमार नहीं होता। (७) साजिश का भ्रमः इसमें पीड़ित को लगता है कि लोग उसके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। उसे महसूस होता है कि सभी उसके बारे में बातें करते हैं या उसे घूर रहे हैं। रोगी को ऐसा भी लगता है कि जैसे कुछ लोग उसके ऊपर जादू-टोना करवा रहे हैं या फिर उसके खाने में जहर मिलाया जा रहा है।


कोसारे महाराज :- संस्थापक व राष्ट्रीय अध्य्क्ष

मानव हित कल्याण सेवा संस्था नागपुर

 

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