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आत्मा का अस्तित्व और रहस्य: कोसारे महाराज

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 आत्मा का अस्तित्व और रहस्य: कोसारे महाराज

                       हमारा शरीर पांच तत्वों अर्थात जल, आकाश, वायु, अग्नि और पृथ्वी से बना है। जब किसी की मृत्यु होती है, तो शरीर इन पांच तत्वों के साथ विलीन हो जाता है और आत्मा अदृश्य रूप में रहती है। यदि किसी मृत व्यक्ति ने जीवन भर अच्छे कर्म किए हैं, तो वैदिक ग्रंथों के अनुसार उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। तब जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है।

                     आत्मा का कोई धर्म नहीं होता, वह न नर है न नारी, वह तो परमात्मा का अंश मात्र है। ईश्वर न हिंदू है, न मुसलमान, न सिख, न ईसाई, न यहूदी, न बौद्ध, सारी दुनिया ईश्वर से पैदा हुई है। आत्मा एक ऐसी जीवन शक्ति है, जिससे हमारा शरीर जीवित रहता है। यह एक दिव्य शक्ति है, यह कोई व्यक्ति नहीं है। इस जीवन-शक्ति के बिना, हम अपना जीवन खो देते हैं और हम धूल में मिल जाते हैं। जब आत्मा या जीवन-शक्ति शरीर को छोड़ देती है, तो शरीर मर जाता है और जहां से उत्पन्न हुआ था, अर्थात् पृथ्वी के पांच तत्वों में वापस आ जाता है। उसी तरह जीवन-शक्ति भी वहीं लौट जाती है जहां से वह आई थी, यानी भगवान के पास।

                      आधुनिक समय में ऐसे कई प्रयोग हुए हैं, जो इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि आत्मा का वास्तव में अस्तित्व है। ऐसा ही एक प्रयोग फ्रांसीसी डॉक्टर हेनरी बाराडुच ने किया था, उन्होंने एक विशेष कैमरा बनाया और मृत्यु के बाद निकली आत्मा की तस्वीर लेने के लिए तैयार किया। संयोग से एक बार उनका बेटा बहुत बीमार हो गया। यदि उसके जीवित रहने के कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे, तो इस वैज्ञानिक ने परीक्षण करने का मन बना लिया। वैज्ञानिक ने पहले यह प्रयोग अपनी पत्नी पर किया था। लेकिन उस समय केवल वह प्रकाश किरणों की पुष्टि करने में सक्षम था।

                      कैलिफोर्निया के वैज्ञानिक ने एक ऐसा सार्वजनिक प्रदर्शन भी किया, जिसमें उन्होंने अखबार के रिपोर्टर को बुलाया। उन्होंने वहां की कुछ रहस्यमयी किरणों की तस्वीरें साधारण कैमरों से लीं। इस प्रयोग के बाद आम तौर पर वैज्ञानिकों का मानना ​​था कि मानव शरीर में कुछ चेतन तत्व, कुछ रहस्यमय किरणें, कुछ अजीब तत्व और प्रकाश है, लेकिन वे इसका रहस्य नहीं जान सके।

क्या आत्मा जिंदगी और मौत के बीच की कड़ी है?

          आत्मा या आत्मन् पद भारतीय दर्शन के महत्त्वपूर्ण प्रत्ययों (विचार) में से एक है। यह उपनिषदों के मूलभूत विषय-वस्तु के रूप में आता है। जहाँ इससे अभिप्राय व्यक्ति में अन्तर्निहित उस मूलभूत सत् से किया गया है जो कि शाश्वत तत्त्व है तथा मृत्यु के पश्चात् भी जिसका विनाश नहीं होता। जिंदगी और मौत के बीच में जो सबसे बड़ी कड़ी है वह है आत्मा। आत्मा शरीर में है तो जिंदगी है और आत्मा ने शरीर को छोड़ दिया तो शरीर के बेजान पुतला है। इसलिए जिंदगी और मौत के विज्ञान में सबसे उलझा रहस्य आत्मा का है।


          इस रहस्य को जिसने जितना जानने का प्रयास किया वह इसमें उतना ही उलझता गया। जब उलझन बहुत गहरा गई और सृष्टि के सबसे बड़े रहस्य से पर्दा उठा पाना संभव नहीं हो सका तो कितने ही दार्शनिकों और विद्वानों ने आत्मा के अस्तित्व को ही नकार दिया और कह दिया कि आत्मा हमारे मन, मस्तिष्क और चेतना से अलग कुछ भी नहीं है।


        आधुनिक वैज्ञानिक तो यह भी कहते हैं विचार मस्तिष्क क्रिया का फल है, वे मन को मस्तिष्क का सह परिणामी मानते हैं। उनके अनुसार मस्तिष्क का कार्य समाप्त होते ही मन, ज्ञान, चेतना और सभी तरह के मानसिक क्रियाकलाप तुरंत रुक जाते हैं। आत्मा जैसी किसी वस्तु का अस्तित्व ही नही है। इसलिए मृत्यु के बाद जीवन का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। लेकिन आत्मा के बारे में एक बारगी यह कह देना और स्वीकार कर लेना सही नहीं है कि आत्मा है ही नही।

अगर आत्मा नहीं है तो फिर यह कैसे संभव है :


हिन्दू दर्शन का सबसे बड़ा ग्रंथ गीता यह साफ-साफ कहता है कि आत्मा अजर है, अमर है, शाश्वत है। यह उस समय था जब यह सृष्टि हुई थी और यह तब भी होगा जब सृष्टि समाप्त हो जाएगी।

आत्मा के अस्तित्व को मिस्रवासी भी मानते थे। लेकिन यह आत्मा की द्वितीय सत्ता पर विश्वास करते थे। इनके अनुसार आत्मा शरीर की छाया है। जितने दिन शरीर रहता है उतने ही दिन छाया रहती है।

इसलिए मिस्र में शरीर को ममी बनाकर रखने की प्रथा का प्रचलन हुआ। उनका विश्वास था कि शरीर के किसी अंश के क्षतिग्रस्त होने पर छाया का भी वही अंश क्षतिग्रस्त होगा। इसलिए आत्मा को सुरक्षित रखने के लिए वे शरीर को सुरक्षित रखते थे और उन्हें खत्म नहीं होने देते थे।

ईसा मसीह के बारे में कहा जाता है कि वह सूली पर चढ़ाए जाने के कुछ दिन बात जीवित हो गए थे। इसलिए क्रिश्चियनों में भी यह धारण है कि मृत शरीर फिर उठकर खड़ा हो जाएगा इसलिए वह मृत शरीर को कब्र में रखते हैं। यानी आत्मा के अस्तित्व को वह भी स्वीकार करते है।

 

कोसारे महाराज :- संस्थापक व राष्ट्रीय अध्य्क्ष

मानव हित कल्याण सेवा संस्था नागपुर

 

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