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स्वच्छता केवल प्रशासन की नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी है | स्वच्छ भारत संदेश | Kosare Maharaj

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स्वच्छता हमारा योगदान स्वच्छता केवल प्रशासनिक उपायों के बलबूते नहीं चल सकती





                      पक्ष और विपक्ष की चर्चा सबसे ज्यादा राजनीतिक संदर्भ में की जाती है। दोनों एक-दूसरे की न केवल कमियां खोजते हैं, बल्कि दूसरे पर प्रहार भी करते हैं। लेकिन इन दोनों तरह की धारणाएं हमारे मन के अंदर भी हैं। एक समय पर पक्ष आता है और पलक झपकते विपक्ष भी खड़ा हो जाता है। अपने ही अंदर के अनुभवों का इतना बडा संसार है कि हमें और कहीं जाने की जरूरत नहीं, लेकिन हम हैं कि मारे-मारे फिरने लगते हैं। जब भी संकट में पड़ते हैं, तो घबराकर हल ढूंढने की बजाय किसी और के दरवाजे पर दस्तक देने लगते हैं।

                      विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करना, उन पर आधी विजय हासिल करने जैसा है। जो खुद को साध लेता है, वह हर प्रश्न का उत्तर खुद से ही पूछ लेता है। लेकिन इसके लिए स्वयं पर भरोसा सबसे जरूरी है। साधने का संबंध आत्म-साधना से है, जो जीवन को अनुशासित और व्यवस्थित करती है। जिसके पास आत्मशक्ति होती है, उसे न तो दुख परेशान करता है और न अपमान हिला पाता है। ऐसे लोग पक्ष और विपक्ष, अच्छे और बुरे, दोनों के साक्षी बन जाते हैं। उन्हें सही और गलत का फैसला करना आ जाता है। इसके लिए मन के ज्ञान को विज्ञान से जोड़ना  जरूरी है। विज्ञान खोज की एक प्रक्रिया है, जिसे हमारा शास्त्र आत्म-मंथन कहता है। विज्ञान और शास्त्र हमेशा साक्षी रहने का भाव जगाते हैं।

                     वे समस्या को संकट के रूप में नहीं, बल्कि समाधान के प्रस्थान बिंदु के रूप में देखते हैं। लेकिन यहां समर्थन और विरोध, दोनों का होना भी जरूरी है। तर्क जितने पक्ष में होते हैं, उससे कहीं ज्यादा विपक्ष में होते हैं। इसी से सही निष्कर्ष पर पहुंचने में कामयाबी मिलती है। लोकतंत्र की तरह ही खुद के भीतर भी पक्ष और विपक्ष का होना आवश्यक है।

                    शहर व  गाँव, मोहल्ले या सरकारी कॉलोनियां  हो या फ्लैट  के परिसर में स्वच्छता का हमें काफी ध्यान रखना चाहिये औरो को भी जाग्रति करना चाहिये यह हमारा सभी लोगो का प्रथम कर्तव्य हैं ।

                  स्वच्छता : हमारा योगदान- स्वच्छता केवल प्रशासनिक उपायों के बलबूते नहीं चल सकती। इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी परम आवश्यक होती है। हम सभी अनेक प्रकार से स्वच्छता से योगदान कर सकते हैं,  घर का कूड़ा-करकट गली या सड़क पर न फेंकें। उसे सफाई कर्मी के आने पर उसकी ठेला  या वाहन में ही डालें। कूड़े-कचरे को नालियों में न बहाएँ। इससे नालियाँ अवरुद्ध हो जाती हैं। गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता है। हमारा ही शहर व  गाँव गंदा नजर आता हैं उससे दूसरे शहर, या गाँव में बुरा प्रभाव पड़ता हैं हमें ही समस्या का काफी  सामना करना पड़ता हैं अभी कुछ चंद दिनों में जून महीने से बारिश चालू हो रही हैं हम सभी को इसकी  काफी हमें  सभी को जानकारी है।

                  मोहल्ले में जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण गंदा पानी रास्ते में जमा रहता है। बरसात के दिनों में करीब दो से तीन फुट पानी सड़क पर भर जाता है। इस बारिश के समय में  सड़क पर जलभराव रहने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ पड़ता  है। स्थानीय लोगों की माने तो बरसात में जलभराव से गंदा पानी घरों में घुस जाता है।

               ग्रामीणों का कहना है कि समस्या समाधान की मांग को लेकर पहले कई बार संबंधित विभागीय अफसरों व जनप्रतिनिधियों से मांग भी की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।  लोगों का कहना है कि बाजार जाने के लिए भी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। मोहल्ले में दवा का छिड़काव न होने से मच्छरों की संख्या भी बढ़ गई है। मोहल्ले में कई सालों से जलभराव की समस्या से जूझना पड़ रहा है। जलनिकासी की व्यवस्था न होने से घरों का गंदा पानी रास्ते में भरा रहता है। बरसात में तो स्थिति काफी खराब हो जाती  है।

             रास्ते में जलभराव के कारण मुहल्ले के लोगों को आवागमन में काफी परेशानी पैदा हो जाती  है। जलभराव एवं कीचड़ के कारण राहगीरों को लोगों के घरों के चबूतरों पर से निकलना पड़ता  है।

             जलभराव होने से मच्छरों की तादात बढ़ती चली जाती  है। ऐसे में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

             पालीथिन का बिल्कुल प्रयोग न करें। यह गंदगी बढ़ाने वाली वस्तुः तो है ही, पशुओं के लिए भी बहुत घातक है। घरों के शौचालयों की गंदगी नालियों में न बहाएँ। खुले में शौच न करें तथा बच्चों को नालियों या गलियों में शौच न कराएँ। नगर पालिका के सफाई कर्मियों का सहयोग करें।
       
                स्वच्छता के लाभ – कहा गया है कि स्वच्छता ईश्वर को भी प्रिय है।’ ईश्वर का कृपापात्र बनने की दृष्टि से ही नहीं अपितु अपने मानव जीवन को सुखी, सुरक्षित और तनावमुक्त बनाए रखने के लिए भी स्वच्छता आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है। मलिनता या गंदगी न केवल आँखों को बुरी लगती है, बल्कि इसको हमारे स्वास्थ्य से भी सीधा संबंध है। गंदगी रोगों को जन्म देती है। प्रदूषण की जननी है और हमारी असभ्यता की निशानी है। अतः व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखने में योगदान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

             स्वच्छता के उपर्युक्त प्रत्यक्ष लाभों के अतिरिक्त इसके कुछ अप्रत्यक्ष और दूरगामी लाभ भी हैं। सार्वजनिक स्वच्छता से व्यक्ति और शासन दोनों लाभान्वित होते हैं। बीमारियों पर होने वाले खर्च में कमी आती है तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय होने वाले सरकारी खर्च में भी कमी आती है। इस बचत को अन्य सेवाओं में उपयोग किया जा सकता है।  


कोसारे महाराज :- संस्थापक व राष्ट्रीय अध्य्क्ष

मानव हित कल्याण सेवा संस्था नागपुर

 

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