जैसे स्वर्ण आग में चमकता है उसी प्रकार धैर्यवान कठिनाई में दमकता है दो चीजें आपको परिभाषित करती हैं: जब आपके पास है तब आपका धैर्य और जब सब कुछ हैं तब आपका रवैया। धैर्य और परिश्रम से हम वो सब प्राप्त कर सकते हैं, जो शक्ति और शीघ्रता से कभी नहीं प्राप्त कर सकते। ... धैर्य रखने से हारी हुई बाजी भी जीती जा सकती हैं। ( कोसारे महाराज )
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