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कोसारे महाराज अनाथ आश्रम एवं वृद्ध आश्रम का संचालन मानव हित कल्याण सेवा संस्था द्वारा किया जायेगा वर्तमान में प्रस्ताव प्रगति पर है।

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कोसारे महाराज अनाथ आश्रम एवं वृद्ध आश्रम का संचालन मानव हित कल्याण सेवा संस्था द्वारा किया जायेगा


कोसारे महाराज अनाथ आश्रम एवं वृद्ध आश्रम का संचालन मानव
हित कल्याण सेवा संस्था द्वारा किया जायेगा
वर्तमान में प्रस्ताव प्रगति पर है।

कोसारे  महाराज  अनाथ आश्रम एवं वृद्ध आश्रम का संचालन मानव हित कल्याण सेवा संस्था द्वारा किया जायेगा वर्तमान में प्रस्ताव प्रगति पर है।


मानव हित कल्याण सेवा संस्था द्वारा संचालित अनाथ बच्चों के लिए अनाथालय खोलने के लिए आगे आ रही हैं। संस्था के अध्यक्ष कोसारे महाराज ने बताया कि मानव हित कल्याण सेवा संस्था के कोसारे महाराज पिछले 25 वर्षों से नशे के खिलाफ जंग छेड़े हुए हैं और नागपुर से करीबन २०० से ३०० किलोमीटर के दायरे के क्षेत्र में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य करते हुए सैकड़ों युवाओं को नशे की गिरफ्त से निकाल चुके हैं। अब मानव हित कल्याण सेवा संस्था अनाथ बच्चों के लिए अनाथ आश्रम खोलने के लिए प्रयास कर रही है। कोसारे महाराज ने बताया कि इसके लिए विभिन्न समाजसेवियों व ग्राम पंचायत और सरकार से इत्यादि लोगो से बात कर अनाथाश्रम के जमीन या भवन आदि उपलब्ध करवाने की मांग की जाएगी।


अनाथ बच्चों को आश्रय देने का  उद्देश्य क्या हैं ?




कोसारे महाराज ने कहा कि वे युवाओं व किशोरों आदि से नशे की लत छुड़ाने के क्षेत्र में पिछले 25 वर्षों से कार्य कर रहे हैं इसके साथ-साथ अब अनाथ व मानसिक रोगी बच्चों को आश्रय देने के उद्देश्य से शहर या आस-पास के क्षेत्र में अनाथाश्रम खोलने की योजना है जिसमें मानव हित कल्याण सेवा संस्था अग्रणी भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि इस अनाथाश्रम का उद्देश्य केवल अनाथ बच्चों को आश्रय प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा को निखारकर उनका भविष्य निखारना व उन्हें देश का एक जिम्मेवार नागरिक बनाना भी होगा। अनाथ बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ खेल व उनकी रुचि व योग्यतानुसार विभिन्न क्षेत्रों में अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि उनका भविष्य संवर सके। उन्होंने बताया कि इसके लिए शहर के समाज सेवियों का सहयोग भी लिया जाएगा।



उमरेड रोड में एक ऐसा कैंपस तैयार हो रहा है जहां घर से निकाले गए बुजुर्ग और अनाथ बच्चे साथ रह सकेंगे। मकसद यही है कि बुजुर्गों को बच्चों का प्यार मिल जाए और बच्चों को मां-बाप का। दोनों एक-दूसरे का सहारा बनकर बेरंग जीवन में एक बार फिर रंग भर सकें।




बुजुर्गों और बच्चों के लिए साथ-साथ वृद्धाश्रम और अनाथ आश्रम बनाने की यह पहल बढ़ते कदम संस्था ने की है। जिसमें वृद्धाश्रम के साथ अनाथ आश्रम खोलने का निर्णय भी लिया गया है। भवन का निर्माण अभी नहीं चल रहा है। संस्था के कोसारे महाराज बताते हैं कि करीबन 3 मंजिल का निर्माण करना होगा है। प्रत्येक मंजिल में 30 बिस्तर और 4 हॉल होंगे।



अनाथ आश्रम की सुविधाएं ?




अनाथ आश्रम भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बने होते हैं। क्योंकि अनाथ आश्रम में अनाथ बच्चों के लिए पूरी व्यवस्था की जाती है ताकि उन बच्चों को ऐसा ना लग सके कि वे अनाथ है, उनके माता-पिता नहीं है।


अनाथ आश्रम में बच्चों को उचित शिक्षा वृद्ध लोगों और महिलाओं को उनका जीवन यापन करने के लिए अच्छा रोजगार प्रदान कराया जाता है। यह रोजगार उन लोगों से आवश्यक रूप से नियम के अनुसार कराया जाता है। यदि वे लोग रोजगार करेंगे तो उसे जो आमदनी होगी, उसका उपयोग उन्हीं लोगों के सेवा और फैसिलिटी इसमें लगाई जाएंगे।


अनाथ आश्रम खोलकर बहुत से ऐसे लोग हैं, जो लोगों की मदद कर रहे हैं और ऐसे में यदि वे लोग सोचे कि हम अनाथ आश्रम खोलकर एक अच्छी कमाई करें तो यह बिल्कुल ही गलत है। अनाथ आश्रम में अनाथ लोगों को रहने के लिए अच्छी सुविधाएं दी जाती हैं ताकि उन्हें ऐसा न लगे कि वह अनाथ है और अनाथ लोगों को ऐसी सुविधाएं देने के पीछे का मकसद सिर्फ और सिर्फ उन्हें एक अच्छा और सामाजिक कार्य करना है।


आश्रम खोलकर जो भी लोग लोगों की सेवा करते हैं, वे खुद इतना ही स्वार्थ रखते हैं ताकि वे लोग जीवन में कुछ पुण्य और आशीर्वाद मिले। अनाथ बच्चों के लिए बहुत से लोग हैं, जो अनाथ आश्रम बनवा रहे हैं और सभी अनाथ बच्चों को छत का साया दे रहे हैं। लोग अपने पापों को दूर करने के लिए किस प्रकार गंगा में स्नान करने जाते हैं, तीर्थ स्थलों पर दान दक्षिणा करते हैं, वैसे ही लोग अपने पापों को दूर करने के लिए और लोगों की मदद करने के लिए अनाथ आश्रम भी खुलवाते हैं।


एक अनाथ आश्रम अनाथ लोगों के लिए कभी भी एक महल से कम नहीं होता, वह अनाथ आश्रम उन सभी अनाथ लोगों के लिए उनके जीने का एक सहारा होता है। वे बच्चे जो जिनके माता-पिता उन्हें उनकी छोटी सी उम्र में ही छोड़ कर चले जाते हैं या फिर किन्ही कारणों से मर जाते हैं तो उनकी देखभाल के लिए कोई भी आगे नहीं बढ़ता, उनके सभी रिश्तेदार भी यह सोचने लगते हैं कि हमारा सारा धन तो इन्हीं में खत्म हो जाएगा और ऐसे बच्चों की परवरिश के लिए अनाथ आश्रम एक विशेष सुविधा अनाथ बच्चों के लिए प्रदान करता है।


एक अनाथ आश्रम में अनाथ लोगों को वे सभी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जो एक मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों को मिलती हैं। यदि हम ऐसा कहें कि अनाथ आश्रम लोगों के लिए एक जीने की इच्छा को बनाती है तो यह गलत नहीं होगा। अनाथ आश्रम में बहुत से ऐसे बच्चे, बूढ़े और महिलाएं होती हैं, जिनका कोई नहीं होता या फिर उन्हें उनके लोग छोड़ कर चले गए होते हैं, उन सभी लोगों को अनाथ आश्रम में एक छत प्रदान किया जाता है ताकि वे अपने जीवन को अच्छे से जी पाए हैं।


अनाथ आश्रम में कई सारे लोग बच्चों का ध्यान रखने के लिए होते हैं, जिनका काम ही बच्चों का ध्यान रखना और उनकी परवरिश करना होता है। एक अनाथ आश्रम में बच्चों की परवरिश करने से लेकर बच्चों की पढ़ाई लिखाई और उन्हें एक योग्य बनाने तक के सभी सुविधाएं अनाथ बच्चों को बिल्कुल निशुल्क रूप में दी जाती है ताकि बच्चे अपना भविष्य बना सके और देश का नाम एवं अपना स्वयं का नाम रोशन कर सकें।

अनाथ आश्रम के लोगों का व्यवहार कैसा हो ?


अनाथ आश्रम में सभी लोगों के साथ अपनों के जैसा व्यवहार किया जाता है और उनके साथ इस तरीके का व्यवहार किया जाता है ताकि उन्हें बिल्कुल भी ना लगे कि वह किसी अनाथालय में है बल्कि उन्हें ऐसा लगे कि वह खुद के ही घर में हैं। अनाथ आश्रम में अनाथ बच्चों को रहने के लिए घर खाने के लिए खाना और पहनने के लिए कपड़े दिए जाते हैं। अनाथ आश्रम में सभी बच्चों को एक समान दर्जा दिया जाता है और उनकी देखरेख से संबंधित सभी कार्यवाही की जाती है।

यदि अनाथ आश्रम बच्चों का अनाथ आश्रम है तो वहां पर सभी बच्चों को प्रतिदिन के हिसाब से पोस्टिक आहार दिया जाता है और इसके साथ-साथ उन्हें उच्च स्तर पर पहुंचाने के लिए शैक्षणिक व्यवस्था अर्थात शिक्षा की भी व्यवस्था की गई है। अनाथ आश्रम में हर दिन बच्चों को अलग-अलग भोजन प्रदान किया जाता है और यह भोजन हर हफ्ते मैं निश्चित किए गए डेट पर ही मिलते हैं।

जैसे हम सभी लोग जानते हैं कि अनाथ आश्रम में सभी बच्चों को बचपन से ही एक ऐसा माहौल तैयार करके दिया जाता है, जहां पर सभी बच्चों को बहुत ही अच्छे स्तर पर शिक्षा प्रदान कराई जाती हैं, इन सभी कारणों की वजह से उन्हें शिक्षा के तरफ काफी तलप होती है। यही कारण है कि अनाथ आश्रम के लगभग 90% बच्चे सरकारी पद पर ही कार्यरत होते हैं।

यदि बात करें कि बच्चों के साथ अनाथ आश्रम में कैसा व्यवहार किया जाता है तो अनाथ आश्रम में बच्चों के साथ बहुत ही अच्छा व्यवहार किया जाता है। वहां पर महिला कर्मचारी सभी बच्चों को एक मां की तरह और पुरुष कर्मचारी उन्हें एक पिता की तरह संभालते हैं और उनका ख्याल रखते हैं।


जरूरतमंद बच्चों के लिए हॉस्टल की सुविधा भी होगी ?


अनाथ बच्चों और बेसहारा बुजुर्गों के अलावा इस आश्रम का लाभ ऐसे जरूरतमंद बच्चों को भी मिल सकेगा जो शहर में पढ़ने के लिए आते हैं। चौथे मंजिल को हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा जहां 30 से 50 छात्रों को रहने की निशुल्क सुविधा मिलेगी। आश्रम साढ़े 15 हजार स्क्वायर फीट का होगा। बिल्डिंग का निर्माण साढ़े 10 हजार स्क्वायर फीट में किया जायेगा वहाँ मंदिर भी होगा जहां रोज पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन, मैडिटेशन भी होंगे।


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